नागपंचमी कब है : जानिए नागपंचमी के महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में

नागपंचमी कब है : जानिए नागपंचमी के महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में 

नागपंचमी कब है – 

नाग पंचमी (Nag Panchami) का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है. नाग पंचमी का दिन भगवान शिव और गण नागों की पूजा का दिन माना जाता है.
इस दिन सांप या नाग की पूजा की जाती है और उन्‍हें दूध पिलाने का विधान है. मान्‍यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन रुद्राभिषेक करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है.

नागपंचमी

हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण यानी कि सावन मास के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का त्‍योहार मनाया जाता है.
नाग पंचमी के दिन घर के प्रवेश द्वार पर नाग चित्र बनाने की भी परम्परा है. माना जाता है कि इससे नागदेव की कृपा बनी रहती है और घर सुरक्षित रहता है. इस बार नाग पंचमी का त्योहार 25 जुलाई को मनाया जाएगा.

नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त –

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक

अवधि – 2 घंटे 43 मिनट

नागपंचमी का महत्‍व –

हिन्‍दू धर्म में देवी-देवताओं के साथ ही उनके प्रतीकों और वाहनों की पूजा-उपाासना की भी परंपरा है. नागपंचमी भी ऐसा ही एक पर्व है. जी हां, हिन्‍दुओं में नाग को देवता की संज्ञा दी जाती है और उनकी पूजा के कई कारण हैं. दरअसल, नाग को आदि देव भगवान शिव शंकर के गले का हार और सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्‍णु की शैय्या माना जाता है.

इसके अलावा नागों का लोकजीवन से भी गहरा नाता है. सावन के महीने में जमकर वर्षा होती है जिस वजह से नाग जमीन के अंदर से निकलकर बाहर आ जाते हैं. ऐसे में माना जाता है कि अगर नाग देवता को दूध पिलाया जाए और उनकी पूजा-अर्चना की जाए तो वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

कालसर्प दोष से मिलती है मुक्ति –

नागपंचमी पर सांप की पूजा करने के धार्मिक कारणों के साथ-साथ ज्‍योतिषीय कारण भी हैं. जब कुंडली में राहु और केतु के बीच में सारे ग्रह आ जाते हैं तो उसे कालसर्प दोष कहते हैं. यह 12 प्रकार का होता है.

माना जाता है कि इस योग के रहने पर जातक को फल नहीं मिल पाता है. मान्‍यता है कि नागपंचमी के दिन पूजा करने से कालसर्पदोष से जातक को मुक्ति मिलती है.

नागपंचमी पूजा के लिए सामग्री – 

नागपंचमी के दिन दूध, दही, कुशा, गंध, पंचामृत, धान, लावा, गाय का गोबर, पुष्‍प, घी, खीर और फल आदि से नाग देवता की पूजा करने का विधान है. इस दिन ब्राह्मणों को भी भोजन करवाया जाता है. पूजा में कई स्‍थानों पर सफेद कौड़ियां भी रखी जाती हैं.

नागपंचमी

मान्‍यता है कि इस दिन नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने से आर्थिक लाभ होता है और जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है.

नागपंचमी की पूजा विधि –

ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी की पूजा को करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और सर्पदंश का डर भी दूर होता है.

तो आइए जानते हैं नाग पंचमी की पूजा विधि –
  • नाग पंचमी के दिन अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक अष्टनागों की पूजा की जाती है.
  • चतुर्थी के दिन एक बार भोजन कर पंचमी के दिन उपवास करके शाम को भोजन करना चाहिए.
  • पूजा करने के लिए नाग चित्र या मिट्टी की सर्प मूर्ति बनाकर इसे लकड़ी की चौकी के ऊपर स्थापित करें.
  • कुछ जगहों पर सोने, चांदी, काठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों बगलों में पांच फन वाले नागदेव अंकित कर पूजते हैं.
  •  हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें.
  • कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर सर्प देवता को अर्पित करें.
  • पूजन करने के बाद सर्प देवता की आरती उतारी जाती है.
  • अंत में नाग पंचमी की कथा ज़रूर सुनें.

इन मंत्रों का करें जाप – 

ऊं भुजंगेशाय  विद्महे,

सर्पराजाय धीमहि,

तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।

‘सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।

ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।।

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।

ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।’

नागपंचमी मंत्र

नागपंचमी पर क्‍या करें..? 

  • इस दिन नाग की पूजा का विधान है. नाग देवता की तस्‍वीर या फिर मिट्टी या धातू से बनी प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए.
  •  इस दिन नाग देवता को दूध पिलाया जाता है.
  • नाग देवता को धान, खील और दूब अर्पित करना चाहिए.
  • इस दिन सपेरों से नागों को खरीदकर उन्‍हें मुक्‍त कराना शुभ माना जाता है.

नागपंचमी के दिन क्‍या न करें..? 

  • कहा जाता है कि इस दिन जमीन की खुदाई नहीं करनी चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना जाता है.
  • नागपंचमी के दिन जमीन पर हल नहीं चलाना चाहिए.
  • कहा जाता है कि इस दिन सुई में धागा भी नहीं डालना चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है.
  • वहीं इस दिन आग पर तवा और लोहे की कढ़ाही चढ़ाना भी उचित नहीं होता है.

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