अनंत चतुर्दशी के दिन ही गणपति बप्पा का विसर्जन क्यों किया जाता है..?

अनंत चतुर्दशी के दिन ही गणपति बप्पा का विसर्जन क्यों किया जाता है..?

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन – 

शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2021) है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु के भक्त पूरे दिन का उपवास रखते हैं और पूजा के दौरान पवित्र धागा बाँधते हैं. कहा जाता है कि लगातार 14 वर्षों तक यह व्रत करने से व्यक्ति को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है.

अनंत चतुर्दशी

भाद्रपद मास की शुक्लपक्ष की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला दस दिन का गणेश महोत्सव बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है. चतुर्थी के दिन भक्त अपने घरों, सार्वजनिक स्थानों और कार्यालयों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने के साथ गणेश उत्सव की शुरुआत करते हैं. दस दिनों तक उनकी पूजा-आराधना की जाती है. बप्पा को तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं और पूरे गणेश उत्सव के बाद धूमधाम के साथ गणेश जी को अनंत चतुर्दशी के दिन जल में विसर्जित कर दिया जाता है. अनंत चतुर्दशी

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर हम बप्पा को दस दिन तक पूजने के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन ही क्यों विसर्जित करते हैं..? आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक कथा –

गणेश विसर्जन के पीछे की रोचक कथा (Interesting story behind Ganesh Visarjan) –

धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी ने ही महाभारत जैसे महान ग्रंथ को लिखा था. कथा के अनुसार ऋषि वेदव्यास जी ने संपूर्ण महाभारत के दृश्य को अपने अंदर आत्मसात तो कर लिया परंतु वे लिखने में असमर्थ थे इसलिए उन्हें किसी ऐसे दिव्यआत्मा की आवश्यकता थी, जो बिना रुके पूरी महाभारत लिख सकें. तब उन्होंने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की. ब्रह्मा जी ने वेदव्यासजी को सुझाव दिया कि गणेश जी बुद्धि के देवता हैं वे आपकी सहायता अवश्य करेंगे. तब उन्होंने गणेश जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की. अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी

गणपति बप्पा को लेखन में विशेष दक्षता हासिल है, उन्होंने महाभारत लिखने के लिए स्वीकृति दे दी. ऋषि वेदव्यास ने चतुर्थी के दिन से लगातार दस दिनों तक महाभारत का पूरा वृतान्त गणेश जी को सुनाया जिसे गणेश जी ने अक्षरशः लिखा. महाभारत पूरी होने के बाद जब वेदव्यास जी ने अपनी आखें खोली तो देखा कि गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत अधिक हो गया था. उनके शरीर के तापमान को कम करने के लिए वेदव्यास जी ने गणेश जी के शरीर पर मिट्टी का लेप किया. मिट्टी सूख जाने के बाद उनका शरीर अकड़ गया और शरीर से मिट्टी झड़ने लगी. अनंत चतुर्दशी

तब  ऋषि वेदव्यास ने गणेश जी को सरोवर में ले जाकर मिट्टी का लेप साफ किया था और उनको सरोवर में डुबकी लगवाई. कथा के अनुसार जिस दिन गणेश जी ने महाभारत को लिखना आरंभ किया था, उस दिन भादों मास की शुक्लपक्ष की चतुर्थी का दिन था, और जिस दिन महाभारत पूर्ण हुई वह अनंत चतुर्दशी का दिन था. बस तभी से गणेश जी को दस दिनों तक बिठाया जाता है और ग्याहरवें दिन गणेश उत्सव के बाद बप्पा का विसर्जन किया जाता है. अनंत चतुर्दशी

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गणेश विसर्जन का तरीका (Method of Ganesh Visarjan) –

घर में स्थापित प्रतिमा का विधिवत पूजन करें. पूजन में नारियल, शमी पत्र और दूब जरूर अर्पित करें. उसके बाद प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाएं. अगर प्रतिमा छोटी हो तो गोद या सिर पर रख कर ले जाएं. प्रतिमा ले जाते समय भगवान गणेश को समर्पित अक्षत घर में अवश्य बिखेर दें. इस दौरान चमड़े का बेल्ट, घड़ी या पर्स न रखें. नंगे पैर ही मूर्ती का वहन और विसर्जन करें. प्लास्टिक की मूर्ती या चित्र न तो स्थापित करें और न ही विसर्जन करें. मिट्टी की प्रतिमा सर्वश्रेष्ठ होती है. विसर्जन के बाद हाथ जोड़कर श्री गणेश जी से कल्याण और मंगल की कामना करें. अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त (Auspicious time for Ganesh Visarjan) –

  • सुबह का मुहूर्त – सुबह 09:10 बजे से दोपहर 01:56 बजे तक
  • दोपहर का मुहूर्त – दोपहर 15:32 बजे से सांय 17:07 बजे तक
  • शाम का मुहूर्त – शाम 20:07 बजे से 21:32 बजे तक
  • रात्रिकाल मुहूर्त – रात्रि 22:56 बजे से सुबह 03:10 बजे तक अनंत चतुर्दशी

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